शैक्षणीक

कई साल से काम कर रहे शिक्षकों को टीईटी परीक्षा देना जरूरी करने की बात सामने आई थी। इस पर सरकार ने आज तुरंत ध्यान दिया है।

इस उम्र में हम परीक्षा कैसे देंगे?

महाराष्ट्र में लंबे समय से सेवा कर चुके वरिष्ठ शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) देना अनिवार्य करने का मुद्दा चर्चा में था। अगर यह शर्त हटाई नहीं गई तो 4 अक्टूबर को राज्यव्यापी मोर्चा निकालने की चेतावनी शिक्षक संघों ने दी थी। संघों ने सुझाव दिया था कि महाराष्ट्र सरकार को तमिलनाडु की तरह इस मामले में कदम उठाना चाहिए। वरिष्ठ शिक्षकों का सवाल था – इस उम्र में हम परीक्षा कैसे देंगे?आज इस मुद्दे पर सरकार ने तुरंत ध्यान दिया। शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. पंकज राजेश भोयर ने सभी संघों के प्रतिनिधियों की बैठक नागपुर में बुलाई। शिक्षक नेता विजय कोंबे ने बताया कि सरकार ने परीक्षा मामले में सकारात्मक रुख दिखाया है और उनकी मांग – सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने – को मान लिया गया है। मंत्री ने बताया कि इस विषय पर पहले मुख्यमंत्री से चर्चा की गई है और सरकार की यही भूमिका है। जल्द ही सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की जाएगी, इसलिए फिलहाल मोर्चा न निकालने की अपील की गई।बैठक के बाद शिक्षक संघों ने फैसला किया कि 18 अक्टूबर तक सरकार को समय दिया जाएगा। अगर इस अवधि में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आगे राज्यव्यापी मोर्चा निकाला जाएगा। 4 अक्टूबर का मोर्चा फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।बैठक में 15 मार्च के संचमान्यता शासन निर्णय में संशोधन करने पर सहमति बनी। साथ ही शिक्षा सेवक, अनुकंपा नियुक्ति, BLO और अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई। इस बैठक में विजय कोंबे, उदय शिंदे, अजय भोयर, राजन कोरेगांवकर, सुधाकर सावंत, लीलाधर ठाकरे, अनिल नासरे, नीलकंठ लोहकरे और अन्य नेता उपस्थित थे। संघों ने बैठक को सफल बताया।

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