शिक्षकों के लिए बड़ी खबर! अब केवल टीईटी पास शिक्षक ही प्रमोशन पा सकेंगे। अपने नौकरी सुरक्षित रखने के लिए भी अब सभी शिक्षकों का टीईटी पास होना जरूरी होगा।

केंद्र सरकार की नीतियों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण राज्य सरकार के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है, ऐसा वरिष्ठ अधिकारी कह रहे हैं। इसलिए शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना अनिवार्य है। कक्षा पहली से आठवीं तक के शिक्षक अब बिना टीईटी पास किए नियुक्त नहीं हो सकेंगे।सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए दो साल की मोहलत दी है। 23 नवंबर को राज्यभर में होने वाली टीईटी के लिए लाखों शिक्षकों ने आवेदन किया है। इससे पहले सेवा वरिष्ठता के आधार पर प्रधानाध्यापक और अन्य पदों पर प्रमोशन होता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया रुक गई है क्योंकि टीईटी अनिवार्य हो गई है।कुछ शिक्षक संघ टैईटी के फैसले के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के सामने राज्य सरकार रास्ता नहीं निकाल सकती। यदि यह फैसला जारी रहता है, तो अगले शैक्षणिक वर्ष में टीईटी दो बार भी हो सकती है और शिक्षकों को इसे पास करना होगा।
पदोन्नती की प्रक्रिया रोक दी गई है, अब मार्गदर्शन सूचनाओं का इंतजार किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी शिक्षकों को ‘टीईटी’ परीक्षा पास करनी होगी। फिलहाल, स्कूल शिक्षा विभाग ने कोर्ट के फैसले के अनुसार शिक्षकों के पदोन्नति रुकी हुई हैं। सोलापुर जिला परिषद के कुछ प्रधानाध्यापक और केंद्र प्रमुखों को इस निर्णय की वजह से पदोन्नति नहीं दी जा सकी है। स्कूल शिक्षा विभाग से इस बारे में मार्गदर्शक निर्देश आएंगे और उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सैकड़ों स्कूलों में प्रभारी मुख्याध्यापक
पदोन्नति के लिए अब ‘टीईटी’ पास करना जरूरी कर दिया गया है। इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग ने मुख्याध्यापक, केंद्रप्रमुख और विस्तार अधिकारी जैसे शिक्षकों की पदोन्नति तुरंत रोक दी है। इस वजह से राज्य में लगभग 500 से ज्यादा जिल्हा परिषद और निजी अनुदानित स्कूलों (कक्षा 1 से 8 तक) के प्रधानाचार्य अभी कार्यवाहक हैं। इनमें सोलापुर जिले के 32 स्कूल भी शामिल हैं। पदोन्नति केवल ‘टीईटी’ पास करने वाले शिक्षकों को उनकी सेवा अवधि के अनुसार मिलेगी।



