अकोल के मेडिकल कॉलेज में ‘मिस्ट्री रैगिंग’ का मामला गूंज उठा!जांच के बाद आरोपों को किया गया खारिज, लेकिन फिर भी क्यों दर्ज हुई शिकायत?
अकोला स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) इस समय एक गंभीर मामले के कारण चर्चा में है।

अकोला के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में रैगिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे महाविद्यालय में तहलका मचा दिया है। एक जूनियर छात्रा द्वारा कथित रैगिंग की शिकायत सीधी राष्ट्रीय मेडिकल कमिशन (NMC) को ईमेल के जरिए की गई, जिससे GMC प्रशासन में हड़कंप मच गया। NMC की जांच रिपोर्ट के बाद महाविद्यालय को शुक्रवार को उनसे एक ईमेल मिला, जिसके बाद GMC प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।NMC की शिकायत के बाद त्वरित बैठक और जांच NMC के ईमेल के आते ही अधीक्षा डॉ. संजय सोनुने ने तत्काल बैठक बुलाकर स्त्रीरोग विभाग सहित अन्य विभागों के प्रमुखों के साथ लंबी चर्चा की। आरोपित जूनियर और सीनियर छात्रों से पूछताछ की गई, लेकिन प्रारंभिक जांच में किसी भी छात्र ने रैगिंग की बात स्वीकार नहीं की।NMC के निर्देशानुसार गठित जांच कमेटी ने दोनों पक्षों के बयानों को बारीकी से सुना, जिसमें रैगिंग की तस्दीक नहीं हुई। इससे सवाल उठने लगे हैं कि यदि रैगिंग नहीं हुई तो शिकायत NMC को क्यों भेजी गई? GMC प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शुरूआती जांच में कोई अनुचित घटना सामने नहीं आई है। मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट डॉ. श्यामकुमार शिरसाम ने भी पुष्टि की कि जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला।दबाव और दबी आवाज के सवालहालाँकि आरोप नकारे गए, फिर भी GMC के गलियारे और छात्र समुदाय में धीरे-धीरे इस मामले को दबाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। कई छात्र सवाल कर रहे हैं, “अगर रैगिंग नहीं हुई तो शिकायतकर्ता सीधे NMC को क्यों लिखे?” इस संदर्भ में आंतरिक दबाव की संभावना पर भी बहस तेज हो गई है।छात्रों में फैले भ्रम और दबाव की अफवाहों के चलते अब इस मामले की पूरी सच्चाई और असली तथ्य उजागर करने के लिए एक गहन और पारदर्शी जांच की मांग उठ रही है, ताकि इस विवाद का हल निकाले जा सके।




