शैक्षणीक

“हजारों शिक्षकों का भविष्य खतरे में है; क्या स्कूलों पर बंदी का खतरा मंडरा रहा है?”

राज्य के हजारों शिक्षकों का भविष्य अंधेरे में है। सरकार इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रही है। शिक्षा विभाग ने 5 दिसंबर तक अतिरिक्त शिक्षकों के समायोजन का आदेश दिया है। शिक्षकों की लंबित सेवा-शर्तों के मामलों में हो रही देरी पर शिक्षक संघों ने कड़ा नाराज़गी व्यक्त की है।
राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि 5 दिसंबर तक सभी अतिरिक्त शिक्षकों का समायोजन पूरा किया जाए। लेकिन अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि कितने शिक्षक वास्तव में अतिरिक्त हैं, इसलिए कितने शिक्षकों का समायोजन करना है, इस पर ही गड़बड़ी बनी हुई है। शिक्षा विभाग ने कहा है कि समायोजन प्रक्रिया 2024-25 के लिए 15 मार्च 2024 के परिपत्र के आधार पर की जाए। 5 दिसंबर 2025 समायोजन की अंतिम तारीख तय की गई है।
लेकिन अचानक आए इस आदेश के कारण कई शिक्षकों को अपनी मूल स्कूल छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ सकता है। वहीं कम छात्र संख्या वाली कई स्कूलों पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। इस बारे में शिक्षक संघों ने चिंता व्यक्त की है।
इस प्रक्रिया के तहत जिन स्कूलों में 20 से कम छात्र हैं, वहाँ के कई शिक्षक “अतिरिक्त” माने जाएंगे। इन्हें दूसरी जरूरतमंद स्कूलों में भेज दिया जाएगा। इससे जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वह कमी तो पूरी होगी, लेकिन नई भर्ती प्रक्रिया रुकने का डर भी व्यक्त किया गया है, ऐसा महाराष्ट्र राज्य मुख्याध्यापक महासंघ के पूर्व उपाध्यक्ष महेंद्र गणपुले ने कहा।
शिक्षकों की सेवा-शर्तें, प्रमोशन, वेतन-निश्चिती, नियुक्ति मान्यता, शिकायतों की सुनवाई आदि कई मामलों पर शिक्षा अधिकारियों के स्तर पर ही निर्णय किया जा सकता है। लेकिन अधिकारी अनावश्यक रूप से ये मामले उपसंचालक कार्यालय की ओर भेजते हैं, जिससे फैसलों में और देरी होती है। इस वजह से हजारों शिक्षकों के मामले कई-कई महीनों तक लंबित रहते हैं।

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