“विधायकों और सांसदों से कैसे व्यवहार करना है, इसे लेकर सरकार ने नया आदेश जारी किया है। इसमें कर्मचारियों के लिए 9 जरूरी नियम बताए गए हैं।”
"विधानसभा का सत्र चल रहा है, इसलिए विभागों को बताया गया है कि इस दौरान स्थानीय स्तर पर कोई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित न करें."

मुंबई: राज्य सरकार ने सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक नई नियमावली तैयार की है। इसमें बताया गया है कि विधिमंडल के विधायकों (MLA) और संसद के सांसदों (MP) के साथ किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए। इस नियमावली में यह स्पष्ट किया गया है कि जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक व्यवहार देना, उनके पत्रों और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करना, तथा सरकारी कार्यक्रमों में उनका सक्रिय रूप से शामिल होना सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसी के तहत सरकार ने एक विस्तृत परिपत्रक जारी किया है, जिसमें विधायक और सांसदों के पत्र व्यवहार और उनके साथ व्यवहार करने के तरीके को 9 बिंदुओं में समझाया गया है।
1. सम्मान और शिष्टाचार
जब कोई विधायक या सांसद किसी कार्यालय में आए, तो सभी अधिकारी-कर्मचारी उन्हें सम्मान और नम्रता से व्यवहार करें।
उनकी बात ध्यान से सुनें और सरकारी नियमों के अनुसार तुरंत सहायता दें।
आने और जाते समय अधिकारी खड़े होकर अभिवादन करें।
फोन पर बात करते समय भी सम्मानपूर्ण भाषा और शिष्टाचार का पालन करें।
2. पत्रव्यवहार – रजिस्टर, समयसीमा और समीक्षा
प्रत्येक कार्यालय में विधायक/सांसद के पत्रों की अलग से भौतिक या कंप्यूटर रजिस्टर में नोंद करें।
ई-ऑफिस में भी VIP Section के अंतर्गत सही पदनाम के अनुसार एंट्री करें।
उनके पत्रों का अंतिम उत्तर अधिकतम दो महीने के अंदर दें (बदली/पदोन्नति को छोड़कर)।
यदि दो महीने में उत्तर देना संभव न हो, तो इसे तुरंत वरिष्ठ अधिकारी तक पहुँचाएं।
हर तीन महीने में विभाग प्रमुख पत्रों की समीक्षा करें।
3. सरकारी कार्यक्रम और निमंत्रण
किसी भी जिला-स्तरीय भूमिपूजन, उद्घाटन आदि कार्यक्रम में सभी मंत्री, राज्य मंत्री, पालकमंत्री, स्थानीय विधायक, सांसद, महापौर, जिला परिषद अध्यक्ष, नगराध्यक्ष, सरपंच आदि को आमंत्रित किया जाए।
कार्यक्रम पुस्तिका में उनके नाम सही और शिष्टाचार के अनुसार छापे जाएं। बैठने की व्यवस्था उचित और सम्मानजनक हो।
4. आरक्षित समय
विभाग/कार्यालय प्रमुख महीने के पहले और तीसरे गुरुवार को 2 घंटे विधायक और सांसद से मिलने तथा काम की समीक्षा के लिए तय करें।
यह समय उन्हें लिखित रूप में बताया जाए।
आपातकालीन मामलों में लोकप्रतिनिधि किसी भी समय कार्यालय आकर अधिकारी से मिल सकेंगे।
5. अधिवेशन के दौरान प्रतिबंध
जब विधानमंडल का अधिवेशन चल रहा हो, तब स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम आयोजित न करें।
यदि कार्यक्रम करना जरूरी हो, तो उसे उस दिन रखें जब सदन की बैठक न हो।
6. विशेषाधिकार समिति की सिफारिशें
विशेषाधिकार समिति के निर्देशों और शिफारिशों का कड़ाई से पालन करें।
सचिवालय से मिलने वाली सूचना पर तुरंत कार्रवाई करें और रिपोर्ट भेजें।
विशेषाधिकार का उल्लंघन होने पर संबंधित अधिकारी/कर्मचारी पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
7. जानकारी उपलब्ध कराने संबंधी मार्गदर्शन
“जानकारी” शब्द की व्याख्या सूचना के अधिकार अधिनियम की संबंधित धाराओं के अनुसार होगी।
विधायक/सांसद यदि जनता से जुड़े कल्याणकारी विषयों की जानकारी माँगें, तो उन्हें वह जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
8. प्रशिक्षण और जागरूकता
मंत्रालय के विभाग अपनी प्रशिक्षण संस्थाओं में अधिकारियों-कर्मचारियों को लोकप्रतिनिधियों को सम्मानजनक व्यवहार देने का प्रशिक्षण शामिल करें।
9. नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई
ऊपर दिए सभी निर्देशों का पालन अनिवार्य है।उल्लंघन, लापरवाही या टालमटोल पाए जाने पर संबंधितअधिकारी। कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।



