ग्राम पंचायतों में सरपंच बने प्रशासक, उपसरपंच व सदस्यों की निगरानी समिति का रहेगा अंकुश

जळगांव / नाशिक:
राज्य में जिन ग्राम पंचायतों की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी है या 28 फरवरी 2026 तक समाप्त होने वाली है, उनकी समय पर चुनाव प्रक्रिया विभिन्न प्रशासनिक कारणों से पूरी नहीं हो सकी। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए ग्रामविकास विभाग ने एक अहम निर्णय लिया है। इसके तहत संबंधित ग्राम पंचायतों के मौजूदा सरपंचों को ही प्रशासक नियुक्त करने के आदेश जारी किए गए हैं।
इससे पहले 23 जनवरी 2026 को इस संबंध में एक पत्र जारी किया गया था, जिस पर विभिन्न स्तरों से आपत्तियां दर्ज हुई थीं। इसके बाद सरकार ने वह पत्र रद्द कर संशोधित नियमावली लागू की। नए आदेशों के अनुसार, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है।
संशोधित व्यवस्था के तहत, मौजूदा सरपंचों को अगले छह महीने या ग्राम पंचायत चुनाव संपन्न होने तक (जो भी पहले हो) प्रशासक के रूप में काम करना होगा। इससे चुनाव में देरी होने पर भी गांवों का प्रशासनिक कामकाज बाधित नहीं होगा।
उपसरपंच व सदस्यों की प्रशासनिक समिति
ग्राम पंचायतों का कामकाज सुचारु और पारदर्शी ढंग से चले, इसके लिए मौजूदा उपसरपंच और सदस्यों की एक प्रशासनिक निगरानी समिति बनाई जाएगी। यह समिति निर्णय प्रक्रिया में भाग लेगी और प्रशासक के रूप में कार्यरत सरपंच पर निगरानी रखेगी।
आंदोलन के बाद सरकार का सकारात्मक रुख
शुरुआत में सीधे प्रशासक नियुक्त करने के फैसले का कई सरपंचों, उपसरपंचों और सदस्यों ने विरोध किया था। उनकी मांग थी कि चुनाव होने तक मौजूदा जनप्रतिनिधियों को ही जिम्मेदारी दी जाए। इसी मांग को लेकर शुक्रवार को राज्यभर में ग्राम पंचायत बंद आंदोलन भी हुआ। आंदोलन के बाद सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए मौजूदा सरपंचों को ही प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया, जिससे आंदोलनकारियों में संतोष का माहौल है।
जळगांव जिले की स्थिति
जळगांव जिले में 783 ग्राम पंचायतों की अवधि समाप्त हो चुकी है या शीघ्र समाप्त होने वाली है। अब इन सभी पंचायतों में मौजूदा सरपंच प्रशासक के रूप में कार्यभार संभालेंगे। इससे पानी आपूर्ति, स्वच्छता, ग्राम विकास योजनाएं, सड़क मरम्मत और विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बिना रुकावट जारी रहेगा।
प्रशासन का मानना है कि इस फैसले से कामकाज में गति आएगी, हालांकि समिति के माध्यम से सामूहिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती भी रहेगी।
चुनाव कब होंगे?
अब ग्रामीण क्षेत्रों की नजर इस बात पर टिकी है कि ग्राम पंचायत चुनाव कब घोषित होंगे और मतदान की प्रक्रिया कब शुरू होगी। संकेत दिए जा रहे हैं कि छह महीने के भीतर चुनाव पूरे कराने की योजना है, लेकिन अभी तक आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है।




