शैक्षणीक

महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: अब स्कूल के ‘हाजिरी रजिस्टर’ गुज़रे ज़माने की बात, 15 जून से ‘AI Bot’ लगाएगा बच्चों की अटेंडेंस!

महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग ने राज्य के स्कूली शिक्षा सिस्टम में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब पहली से लेकर बारहवीं कक्षा तक के सभी स्कूलों में पारंपरिक हाजिरी रजिस्टर पूरी तरह बंद होने जा रहे हैं। नए आदेश के मुताबिक, अब ‘SwiftChat’ ऐप पर ‘स्मार्ट उपस्थिति’ Bot के जरिए शत-प्रतिशत (100%) ऑनलाइन हाजिरी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
​जैसे शिक्षकों के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लागू हुआ था, ठीक उसी तरह अब छात्रों की अटेंडेंस को भी पूरी तरह हाईटेक और अनुशासित बनाया जा रहा है। शिक्षा आयुक्त सच्छिन्द्र प्रताप सिंह (IAS) ने इस डिजिटल आदेश पर मुहर लगा दी है।
​ ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ सीधे दिल्ली से कनेक्ट, AI रखेगा पैनी नज़र
​भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के तहत, महाराष्ट्र का ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ अब सीधे नेशनल विद्या समीक्षा केंद्र से जुड़ चुका है। इसके तहत ‘6A framework’ (हाजिरी, मूल्यांकन, ग्रेडिंग, प्रशासन, अनुकूल शिक्षण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – AI) के जरिए बच्चों की उपस्थिति पर Real-Time (उसी समय) पैनी नज़र रखी जाएगी। यानी अब अटेंडेंस में किसी भी तरह की गड़बड़ी या हेरफेर मुमकिन नहीं होगी!
​ कब से लागू होगा यह नया नियम?
​विदर्भ को छोड़कर पूरे राज्य में: शैक्षणिक वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही, नागपुर और अमरावती संभाग (विदर्भ के 11 जिले) को छोड़कर राज्य के बाकी सभी हिस्सों में 15 जून 2026 से यह डिजिटल हाजिरी अनिवार्य कर दी गई है।
​विदर्भ के स्कूलों के लिए: विदर्भ में भीषण गर्मी को देखते हुए वहां के स्कूलों को थोड़ी राहत दी गई है, उनके लिए यह नियम 30 जून 2026 से लागू होगा।
​जायें शिक्षकों के लिए ‘कड़क’ गाइडलाइंस और टाइमिंग:
​शिक्षकों को ऐप में लॉगिन करने के लिए ‘शालार्थ पोर्टल’ पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, स्कूल का ‘यू-डाइस कोड’ और अपनी ‘शालार्थ आईडी’ का इस्तेमाल करना होगा। जिन शिक्षकों के पास शालार्थ आईडी नहीं है, वे ‘National Teacher Code’ के जरिए लॉगिन कर सकेंगे।
​हाजिरी लगाने का समय:
​दो शिफ्ट वाले स्कूल: सुबह 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
​नियमित (Regular) स्कूल: सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक।
​नाइट स्कूल (रात्रिशाला): रात 9:00 बजे तक हाजिरी दर्ज करनी होगी।
छात्रों का प्रमोशन और टेक्निकल सपोर्ट:
अगर ऐप में किसी छात्र का नाम नहीं दिखता है, तो शिक्षकों को तुरंत ‘यू-डाइस’ (U-DISE) सिस्टम पर जाकर स्टूडेंट प्रमोशन (Grade Progression) की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। किसी भी तकनीकी खराबी या समस्या से निपटने के लिए शिक्षा विभाग ने एक स्पेशल लिंक भी जारी किया है।
​ बड़े अफसरों के हाथ में होगी कमान
​इस पूरी डिजिटल मुहिम को सुचारू रूप से चलाने और इसकी मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तर पर उप-शिक्षाधिकारी (प्राथमिक) को ‘जिला नोडल अधिकारी’ बनाया गया है। हर महीने राज्य स्तर पर इसकी समीक्षा बैठक होगी, जिसमें लापरवाही बरतने वालों पर सख्त नजर रखी जाएगी।
​शिक्षा विभाग के इस कदम से अब महाराष्ट्र के स्कूलों में पारदर्शिता, अनुशासन और ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ का एक नया दौर शुरू होने जा रहा है!

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