शैक्षणीक

बालभारती की चौथी कक्षा की गणित पुस्तक में बड़ा बदलाव; जीवन-आधारित शिक्षा पर ज़ोर, पर बढ़ेगी कठिनाई!

पुणे:
महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल (‘बालभारती’) ने अपने हीरक जयंती वर्ष पर चौथी कक्षा की गणित की किताब में बड़ा बदलाव किया है। अब गणित को रटाने के बजाय घर की चीज़ों, बाज़ार के लेन-देन, घड़ी, कैलेंडर और खेल-कूद के माध्यम से सिखाया जाएगा। नए पाठ्यक्रम में कुल 14 अध्याय शामिल किए गए हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य बच्चों का डर दूर करना और व्यावहारिक समझ बढ़ाना है।
​पुस्तक की मुख्य विशेषताएं:
​बड़ी संख्याएं और बुनियादी गणित: छात्र हजार, दस हजार और लाख जैसी बड़ी संख्याओं को समझने के साथ-साथ जोड़, घटाना, गुणा, भाग और सम-विषम का गहरा अभ्यास करेंगे।
​चित्रों से भिन्न (Fraction) की समझ: आधा (1/2), पाव (1/4) और तीन-चौथाई (3/4) जैसी अवधारणाओं को चित्रों के ज़रिए आसान बनाया गया है।
​दैनिक जीवन और मापन: मीटर, किलोग्राम, लीटर की समझ के साथ-साथ समय देखना और कैलेंडर का उपयोग सिखाया जाएगा।
​व्यावहारिक ज्यामिति (Geometry): बिंदु, रेखा, कोण, त्रिभुज और वृत्त जैसी आकृतियों को वस्तुओं के माध्यम से समझाया गया है ताकि रटने की ज़रूरत न पड़े।
​ विशेषज्ञों की चिंता:
​जहाँ इस नए पैटर्न से गणित को मनोरंजक बनाने का दावा किया जा रहा है, वहीं पाठ्यक्रम की समीक्षा करने वाले गणित विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार, चौथी कक्षा के बच्चों की उम्र के हिसाब से ज्यामिति और कुछ अन्य संकल्पनाओं का कठिनाई स्तर काफी ज़्यादा है, जो बच्चों के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है।

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