बेटे को पास कराने के लिए पूरी परीक्षा प्रणाली का सौदा: मुख्याध्यापक की काली करतूत उजागर, केस दर्ज
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सिंधुदुर्ग:
शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक पिता ने अपने बेटे को 10वीं बोर्ड परीक्षा में अव्वल नंबरों से पास कराने के लिए अपने पद का ऐसा दुरुपयोग किया कि पूरी परीक्षा व्यवस्था को ही बंधक बना लिया। मामला उंबर्डे हाईस्कूल के मुख्याध्यापक संजय कणिराम राठौड़ से जुड़ा है, जिन्होंने अपने बेटे के फायदे के लिए परीक्षा केंद्र के पूरे स्टाफ को ही अपनी साजिश में शामिल कर लिया। इस जालसाजी का भंडाफोड़ होने के बाद कोंकण विभागीय मंडल ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्याध्यापक सहित 24 कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का डंडा चलाया है।
यह पूरा मामला वैभववाडी तालुका के भुईबावडा परीक्षा केंद्र का है। जांच में जो सच सामने आया, उसने बोर्ड के अधिकारियों को भी चौंका दिया। दरअसल, इस केंद्र पर आम छात्रों के लिए कोई सामूहिक नकल नहीं चल रही थी, बल्कि पूरी सरकारी मशीनरी सिर्फ एक खास छात्र (मुख्याध्यापक के बेटे) की उत्तर पुस्तिकाएं बदलने और उनमें हेरफेर करने में जुटी थी। इस सुनियोजित खेल में केंद्र संचालक, उपकेंद्र संचालक, रिलीवर और स्टेशनरी सुपरवाइजर तक शामिल थे, जिन्होंने अपने ईमान का सौदा कर छात्र की पांचों विषयों की आंसर शीट में बड़े पैमाने पर बदलाव किए।
कोंकण विभागीय मंडल के अध्यक्ष राजेश क्षीरसागर ने जांच रिपोर्ट के बाद इस रैकेट पर सर्जिकल स्ट्राइक की है। बोर्ड ने सिंधुदुर्ग के माध्यमिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश देकर मुख्य आरोपी मुख्याध्यापक संजय राठौड़, पर्यवेक्षक संजय कुमार आड़े और परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिका पर बैठकर जवाब लिखने वाले एक अज्ञात बाहरी लेखक के खिलाफ तुरंत पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। तीन मुख्य आरोपियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होते ही पूरे जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है, जबकि बाकी 21 कर्मचारियों पर विभागीय गाज गिरनी तय है।
इस घटना ने साबित कर दिया है कि कैसे कुछ रसूखदार लोग दबाव और लालच के दम पर पूरी परीक्षा प्रणाली को पंगु बना देते हैं। एक तरफ जहां इस कार्रवाई से 24 लोगों का सरकारी करियर हमेशा के लिए खत्म होने की कगार पर है, वहीं जनता और ईमानदार शिक्षकों के बीच इस जालसाजी को लेकर भारी गुस्सा है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला उन माता-पिता के लिए एक कड़ा सबक है जो बच्चों की कामयाबी के लिए शॉर्टकट और अपराध का रास्ता चुनते हैं। फिलहाल, बोर्ड की इस त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की हर तरफ तारीफ हो रही है और जिले के अन्य संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।



