💔 ‘भविष्य अधर में, परिवार बर्बादी की कगार पर!’… TET सक्ती के खिलाफ वर्धा में प्रहार संगठन का आर-पार का एलान

वर्धा में ‘टीईटी’ (TET) की सक्ती को लेकर शिक्षकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। नौकरी और भविष्य पर मंडराते खतरे को देखते हुए प्रहार शिक्षक संगठन ने सड़क पर उतरकर एक बेहद अनोखा और दिल दहला देने वाला ‘दंडवत आंदोलन’ किया। छत्रपती शिवाजी महाराज के पुतले से लेकर कलेक्ट्रेट ऑफिस (जिल्हाधिकारी कार्यालय) तक, शिक्षक जमीन पर लेटकर-लेटकर (दंडवत करते हुए) आगे बढ़े। इस उग्र और भावुक प्रदर्शन के जरिए जिलाधिकारी के माध्यम से देश की राष्ट्रपति को एक आपातकालीन ज्ञापन (निवेदन) सौंपा गया है।
🚨 क्या है पूरा मामला? क्यों भड़के हैं शिक्षक? शिक्षकों के इस भारी आक्रोश की वजह है सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला। 31 अगस्त 2026 की डेडलाइन: आदेश के मुताबिक, देश के लगभग 20 लाख कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2026 तक टीईटी (Teacher Eligibility Test) परीक्षा पास करना अनिवार्य है। प्रमोशन पर रोक और नौकरी से छुट्टी: जो शिक्षक इस तय समय में परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे, उनका प्रमोशन रोक दिया जाएगा। इतना ही नहीं, 1 सितंबर 2028 के बाद उन्हें सीधे नौकरी से बर्खास्त (सेवामुक्त) कर दिया जाएगा।
🔥 “20-25 साल के अनुभव पर सिर्फ 2 घंटे की परीक्षा भारी?” आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रहार शिक्षक संगठन के नागपुर संभाग प्रमुख अजय भोयर और प्राथमिक शिक्षक समिति के प्रदेश अध्यक्ष विजय कोंबे ने सरकार और व्यवस्था पर तीखे सवाल दागे हैं। ”देश के इतिहास में आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी कर्मचारी या अधिकारी की बकायदा भर्ती होने और 20-25 साल की शानदार सेवा पूरी करने के बाद, अचानक नौकरी बचाने के लिए कोई नई परीक्षा थोप दी जाए! यह देश के 25 लाख शिक्षकों के परिवारों को बर्बाद करने और पूरी शिक्षा व्यवस्था को खोखला करने वाला फैसला है।” — अजय भोयर, प्रहार शिक्षक संगठन शिक्षकों का साफ कहना है कि 25 साल के तजुर्बे को दरकिनार कर, सिर्फ 2 घंटे की एक परीक्षा के आधार पर किसी को नौकरी से निकालना सरासर अन्याय है। उन्होंने मांग की है कि राष्ट्रपति इस मामले में तुरंत दखल दें और कोई बीच का रास्ता निकालकर लाखों शिक्षकों को न्याय दें।
👥 आंदोलन में उमड़ा शिक्षकों का सैलाब इस ऐतिहासिक दंडवत आंदोलन में प्रहार शिक्षक संगठन और महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति के दिग्गज नेताओं सहित सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए। प्रमुख रूप से उपस्थित रहे: पुंडलिक नाकतोडे, मुकेश इंगोले, नरेंद्र थुटे, प्रीती शर्मा, धनराज कावटे, इम्रानुल्ला खान, प्रवीण घोडखांडे, राजीव धात्रक, उमेश खंडार, रहीम शहा, दत्तात्रय राऊळकर, संजय बारी, विलास बरडे, रत्नाकर निखारे, रवींद्र उईके, धीरज समर्थ, अजय बोबडे, सुधीर सगणे, उर्मिला चौधरी, रत्नमाला कन्नाके, दिपाली राडे, अजय काकडे, अजय मोरे, अतुल उडदे, प्रवीण पाटभाजे, प्रशांत निंभोरकर, मनीष ठाकरे, कल्पना उईके, स्मिता गेडे, वैशाली चिकटे, विनीत आहाके, अरुण राऊत, कुलदीप पवार, पवन बानोकर, निखिल वाघमारे, रामेश्वर सुरकार, विजय पाली, ताराचंद भुसे, सौरभ वाघ, अर्पित वाघ, अभिजीत जांभुळकर, प्रदीप भट, अजय कोल्हे और मेहत्रे समेत भारी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद थीं। अब देखना यह है कि सड़कों पर पेट के बल रेंगकर न्याय मांग रहे इन गुरुजनों की पुकार क्या दिल्ली के गलियारों तक पहुंच पाती है या नहीं!