शैक्षणीक

महाराष्ट्र के उन शिक्षकों को पदोन्नति नहीं दी जाएगी! टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) से जुले मामले में मुंबई हाईकोर्ट ने जिलों के प्रशासन को निर्देश दिए हैं।

यह खबर बताती है कि मुंबई उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश में कहा है कि जो शिक्षक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी या सीटीईटी) पास नहीं हैं, उन्हें पदोन्नति (प्रमोशन) नहीं दी जानी चाहिए।ठाणे जिला परिषद ने इस नियम का पालन नहीं किया, इसलिए न्यायालय ने उस पर कड़ी नाराज़गी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा है कि केवल वही शिक्षक पदोन्नति के योग्य होंगे जिन्होंने टीईटी या सीटीईटी परीक्षा पास की है और जिनका नाम 2018 या 2019 के टीईटी घोटाले में नहीं आया है।इस मामले में अलंकार वारघड़े और अन्य सात शिक्षकों ने याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि वे टीईटी/सीटीईटी पास हैं, फिर भी उन्हें पदोन्नति की सूची में शामिल नहीं किया गया, जबकि कई अपात्र (परीक्षा पास न करने वाले) शिक्षकों के नाम उस सूची में हैं।न्यायालय ने इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि टीईटी या सीटीईटी परीक्षा पास होना न सिर्फ शिक्षक बनने के लिए बल्कि पदोन्नति पाने के लिए भी कानूनी रूप से जरूरी है — यह बात सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।फिर भी, ठाणे जिला परिषद ने इस नियम की अनदेखी की और मार्गदर्शन के लिए शिक्षा सचिव को पत्र लिखा। न्यायालय ने कहा कि अगर जिला परिषद ने पहले से ही सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्णय पढ़े होते, तो ऐसे निर्देश मांगने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।न्यायालय ने आदेश दिया है कि ठाणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को 27 नवंबर तक शपथपत्र (एफिडेविट) दाखिल करना होगा और तब तक टीईटी या सीटीईटी पास किए बिना किसी शिक्षक को पदोन्नति नहीं दी जानी चाहिए।

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