शैक्षणीक

शिक्षकों ने स्कूल समय में मोबाइल-व्हाट्सएप इस्तेमाल न करने का आह्वान किया

महाराष्ट्र प्राइमरी टीचर्स कमेटी महाराष्ट्र राज्य प्राइमरी टीचर्स कमेटी ने शिक्षकों से स्कूल के समय में मोबाइल और व्हाट्सएप का इस्तेमाल न करने की अपील की है। कमेटी के राज्य अध्यक्ष विजय कोम्बे का कहना है कि लगातार आने वाले ऑनलाइन मैसेज से मोबाइल हैंग हो जाता है, पर्सनल डेटा खर्च होता है और मेंटल स्ट्रेस बढ़ता है।शालाओं में पढ़ाई के साथ-साथ सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों, रिपोर्ट्स और डेटा कलेक्शन के लिए शिक्षकों को अपने निजी मोबाइल इस्तेमाल करने पड़ते हैं। इससे पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे शिक्षक नाराज हैं। कोम्बे ने कहा कि पढ़ाई पीछे छूट रही है और रिजल्ट आने पर गुणवत्ता सुधार के नाम पर शिक्षकों को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है।स्कूल में मोबाइल पर काम करने से बच्चे और अभिभावकों में गलतफहमियां होती हैं। लगता है कि टीचर पढ़ा नहीं रहे, बल्कि मोबाइल में व्यस्त हैं। इससे शिक्षकों की सामाजिक और प्रोफेशनल इमेज खराब हो रही है।ज्यादातर जानकारी व्हाट्सएप ग्रुप्स से मांगी जाती है। पर्यवेक्षण तंत्र ने अपनी सुविधा के लिए बने अनधिकृत ग्रुप्स से शिक्षक बाहर निकलें और दबाव में दोबारा न जुड़ें। पहले कई शिक्षकों ने ऐसा किया, लेकिन कोई अनुशासनिक कार्रवाई नहीं हुई।स्कूल समय में इंटरनेट बंद रखें, व्हाट्सएप पर ‘रीड’ ऑप्शन बंद करें और पढ़ाई के समय ऑनलाइन काम न करें। जरूरी हो तो फोन कॉल से संपर्क हो सकता है, इंटरनेट हमेशा ऑन रखने की जरूरत नहीं।स्कूल खत्म होने के बाद कोई एडमिनिस्ट्रेटिव मैसेज न भेजें। ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ का इस्तेमाल जरूरी है। “साहब क्या कहेंगे” की भय से ऊपर उठकर शिक्षक एकजुट होकर सख्त रुख अपनाएं, ऐसी अपील कमेटी ने की है।

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