धाराशिव का ‘नो गैजेट’ फॉर्मूला: भोंगा बजते ही 2 घंटे के लिए बंद होंगे टीवी और मोबाइल, बच्चों के लिए बना ‘स्टडी पैटर्न’
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महाराष्ट्र: आज के डिजिटल युग में जहाँ बच्चे टीवी और मोबाइल की स्क्रीन से चिपके रहते हैं, वहीं महाराष्ट्र के धाराशिव जिले ने बच्चों को वापस किताबों की ओर मोड़ने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। जिले में अब शाम को एक विशेष सायरन (भोंगा) बजेगा, जो इस बात का संकेत होगा कि अब मनोरंजन छोड़कर पढ़ाई का वक्त हो गया है।
क्या है यह नया ‘अभ्यास पैटर्न’?
धाराशिव जिला परिषद की अध्यक्ष अर्चना पाटिल के नेतृत्व में इस अभिनव उपक्रम की शुरुआत की गई है। इस योजना की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
समय का निर्धारण: रोज़ाना शाम 7:00 बजे से रात 9:00 बजे तक पूरे जिले में टीवी और मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने का लक्ष्य है।
अलार्म बेल: शाम 7 बजते ही गाँव के मंदिरों या ग्राम पंचायतों से भोंगा बजाया जाएगा। यह बच्चों के लिए पढ़ाई शुरू करने और अभिभावकों के लिए टीवी बंद करने का संकेत होगा।
760 ग्राम पंचायतों की भागीदारी: इस मुहिम में जिले की सभी 760 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है।
अधिकारियों की गस्त: यह नियम केवल कागजों तक सीमित न रहे, इसके लिए शिक्षा निरीक्षकों और ग्राम स्तरीय अधिकारियों की एक विशेष टीम बनाई गई है। यह टीम गांवों में गस्त करेगी और घर-घर जाकर देखेगी कि टीवी वास्तव में बंद हैं या नहीं।
शिक्षा के स्तर को सुधारने की अन्य पहल
सिर्फ टीवी बंद करने तक ही प्रशासन सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं:
सेमी-इंग्लिश पैटर्न: जिला परिषद के स्कूलों में फिर से ‘सेमी-इंग्लिश’ माध्यम की शुरुआत की जाएगी।
गाँव गोद लेना: प्रत्येक बड़े अधिकारी को एक गाँव दत्तक (गोद) दिया जाएगा, ताकि वे वहां की शिक्षा व्यवस्था पर सीधी नजर रख सकें।
वाचन अभियान: बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए विशेष वाचन मुहिम चलाई जाएगी।
अभिभावकों से विशेष अपील
अर्चना पाटिल ने अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा ”बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए माता-पिता को इन दो घंटों के लिए टीवी का त्याग करना होगा। यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक कर्तव्य है।”
निष्कर्ष
धाराशिव के इस ‘स्टडी पैटर्न’ की चर्चा अब पूरे महाराष्ट्र में हो रही है। हालांकि, घरों के भीतर टीवी बंद करने की इस ‘सख्ती’ पर आम जनता का स्थायी रुख क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, शिक्षाविदों ने प्रशासन के इस साहसी निर्णय का पुरजोर स्वागत किया है।



