शैक्षणीक

शिक्षा विभाग का बड़ा प्रहार: 10 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट!

शिक्षा बचाने और शिक्षक बचाने का संघर्ष! 📢 ​महाराष्ट्र सरकार के अन्यायपूर्ण 'संशोधित निकष' के कारण 10,000 शिक्षकों की सेवा समाप्त होने की कगार पर है। इस तानाशाही के खिलाफ कनिष्ठ महाविद्यालयीन शिक्षक संघ का बड़ा ऐलान!

पुणे: राज्य शिक्षा विभाग द्वारा जूनियर कॉलेज (कनिष्ठ महाविद्यालय) की ‘संच मान्यता’ के 50 साल पुराने मानदंडों को बदलने की तैयारी की जा रही है। इन नए और कठोर नियमों के कारण महाराष्ट्र के लगभग 10,000 शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक रही है। इसके विरोध में महाराष्ट्र राज्य जूनियर कॉलेज शिक्षक महासंघ द्वारा सोमवार, 11 मई 2026 को दोपहर 12:30 बजे शिक्षा आयुक्त कार्यालय पर विशाल मोर्चा निकाला जाएगा।
​विवादास्पद नए नियम और उनके प्रभाव:
​आधार की अनिवार्यता: जिन छात्रों का आधार वैलिडेट नहीं होगा, उन्हें संच मान्यता में गिना ही नहीं जाएगा, भले ही वे साल भर कक्षा में मौजूद रहे हों।
​बदली हुई समय सारिणी: लेक्चर का समय 45 मिनट से घटाकर 40 मिनट करने से कार्यभार कम होगा, जिससे हर 9 शिक्षकों में से 1 शिक्षक का पद समाप्त हो जाएगा।
​विज्ञान संकाय को नुकसान: प्रैक्टिकल के लिए 20 के बजाय 40 छात्रों का ग्रुप अनिवार्य करने से विज्ञान शिक्षकों का 40% कार्यभार कम हो जाएगा।
​कठोर छात्र संख्या: शहरी क्षेत्रों में 80 और ग्रामीण क्षेत्रों में 60 छात्रों पर ही तुकड़ी मान्य होगी। साथ ही 20 वर्ष से अधिक आयु के छात्रों को गिनती से बाहर रखा जाएगा।
​विशेष छूट खत्म: छात्राओं के कॉलेज, आदिवासी क्षेत्रों के स्कूल और आश्रम शालाओं को मिलने वाली विशेष राहत अब समाप्त की जा रही है।
​पदों की कटौती: लैब अटेंडेंट, चपरासी और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों के पदों को भी अमान्य किया जा रहा है।
​शिक्षण सह-निदेशक डॉ. श्रीराम पानझडे और निदेशक डॉ. महेश पालकर को बार-बार चेतावनी देने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। महासंघ की स्पष्ट मांग है कि “पुरानी संच मान्यता के मानदंड ही लागू रखे जाएं ताकि शिक्षकों की सेवा सुरक्षित रहे और छात्रों का शैक्षणिक नुकसान न हो।”

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