शैक्षणीक

शिक्षक संघों का चेतावनी—“15 मार्च 2024 के निर्णय को वापस करो, वर्ना बेमुदत शाला बंद”

1. घटना का सार:
मुंबई, कोल्हापूर व छत्रपती संभाजीनगर में शिक्षक एवं मुख्याध्यापक संघों ने राज्य सरकार से 15 मार्च 2024 के आदेश में बदलाव करने और टीईटी संबंधी शीघ्र निर्णय लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी है — यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो वे “बेमुदत शाला बंद” का आंदोलन शुरू करेंगे।
2. कहाँ-कहाँ प्रदर्शन हुआ:
महाराष्ट्र के कई स्थानों पर, विशेषकर मुंबई के शिक्षा निरीक्षक कार्यालय के सामने, बड़े पैमाने पर मुख्याध्यापक व शिक्षक जमा हुए और जोरदार नारेबाजी की। आयोजक नेताओं में संजय पाटील (बृहन्मुंबई माध्यमिक व उच्च माध्यमिक मुख्याध्यापक संघ अध्यक्ष), अनिल बोरनारे (मुंबई मुख्याध्यापक संघ उत्तर विभाग अध्यक्ष) सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद थे।
3. शासन का विवादित आदेश (15 मार्च 2024):
रिपोर्ट के अनुसार 15 मार्च 2024 के शासन निर्णय के कारण कई शिक्षकों को अतिरिक्त घोषित करने का प्रावधान हुआ है, जिससे सैकड़ों शालाएँ “शून्य शिक्षकी” (एंडक्टिवली शिक्षकों से वंचित) बन सकती हैं — यह शिक्षक संघों के अनुसार अन्यायकारी है।
4. शिक्षक संघों का अल्टीमेटम:
संघों ने कहा है कि यदि उक्त निर्णय वापस नहीं लिया गया और टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) से संबंधित तात्कालिक राहत नहीं दी गई, तो वे कठोर आंदोलन करेंगे  और जरूरत पड़ी तो बेमुदत शाला बंद भी करेंगे।
5. सीधे आरोप व चिंता:
अनिल बोरनारे ने चेतावनी दी कि इस निर्णय के कारण हजारों विद्यार्थी शिक्षकहीन रह जाएंगे, इससे छात्र-टर्नआउट घटेगा और शैक्षिक नुकसान बढ़ेगा। इसलिए पुरानी संख्या के अनुसार शिक्षक आवंटन बहाल करना आवश्यक है।
6. शिक्षक संघों की प्रमुख मांगे (सूची):
* सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करने की शर्त को पूरी तरह हटाया जाए।*
15 मार्च 2024 का निर्णय तुरंत रद्द किया जाए।
1 नवंबर 2005 के बाद नियुक्त सभी शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।
* शिक्षकों को 10-20-30 वर्षों पर आश्वासित प्रगति  दी जाए।
** शिक्षणसेवक पद हटाकर प्रारंभिक नियुक्ति से ही स्थायी (परमानेंट) नियुक्ति की जाए।
7. हिस्सेदारी और प्रभाव के आँकड़े:
छत्रपती संभाजीनगर जिले में लगभग 3,000 स्कूलों के लगभग 19,000 शिक्षकों ने इस आंदोलन में भाग लिया। सरकार ने वेतन-कटौती का एक दिन का नोटिस दिया था — बावजूद इसके चरणबद्ध रूप से हड़ताल जारी रही।
8. कोल्हापूर का व्यापक असर:
टीईटी अनिवार्य करने के निर्णय के विरोध में कोल्हापूर जिले के शिक्षक-शिक्षाकर्मियों ने राज्यव्यापी बंद आंदोलन में भाग लिया — जिले की 2,882 विद्यालयों में से लगभग 1,970 प्राथमिक, 856 माध्यमिक और महापालिका की 56 शालाएँ पूरी तरह बंद रहीं। वहां भारी रैली और जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन भी हुआ।
9. प्रदर्शन के दौरान घटनाक्रम:
कोल्हापुर में हजारों शिक्षकों का मार्च निकला, कुछ समय के लिए सड़कों पर ठिय्या प्रदर्शन हुआ और जिलाधिकारी कार्यालय पर जाते समय पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की भी घटनाएँ देखी गईं। छत्रपती संभाजीनगर में कुछ जिल्हा परिषद शाळाओं ने विद्यार्थियों के नुकसान को रोकने हेतु कक्षाएँ चालू रखीं।
10. सरकारी दृष्टिकोण व संभावित परिणाम:
संघों का दावा है कि कानून बनाते समय जो नियम जोड़े गए वे शिक्षकों के विरुद्ध हैं — इसलिए हड़ताल और बंद का आह्वान किया गया है। इस आंदोलन ने शिक्षा विभाग पर तत्काल निर्णय लेने का दबाव बना दिया है; आने वाले दिनों में शिक्षक व शासन के बीच होने वाली चर्चाएँ राज्यभर की शालाओं के संचालन पर निर्णायक प्रभाव डाल सकती हैं।
11. नेताओं का चेतावनी व अंतिम संदेश:
अनिल बोरनारे ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने उचित वतर्कसंगत कदम नहीं उठाए, तो विद्यार्थी हित में वे “बेमुदत शाला बंद” करने से पीछे नहीं हटेंगे — जिससे शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा और सरकार पर दबाव बढ़ेगा।
12. निष्कर्ष / आगे की राह:
मामले का समाधान सरकार और शिक्षक संगठनों के मध्य होने वाली वार्ता पर निर्भर करेगा। यदि मांगों का तात्कालिक समाधान नहीं निकला, तो राज्यभर में स्कूलों के कामकाज पर व्यापक प्रभाव की संभावना बनी हुई है — जिससे विद्यार्थियों के शैक्षिक नुकसान की आशंका है।

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